AI के बढ़ते प्रभाव से जल संकट की चेतावनी, 2030 तक 1.3 अरब लोग हो सकते हैं प्रभावित
AI के चक्कर में सूख रहीं नदियां, 2030 तक पानी को तरसेगी 1.3 अरब आबादी! UN की स्टडी में खौफनाक खुलासा

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यूनाइटेड नेशंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता उपयोग जल संसाधनों पर भारी दबाव डाल सकता है। 2030 तक, AI से जुड़े डेटा सेंटर्स की पानी की खपत 1.3 अरब लोगों की घरेलू जरूरतों के बराबर हो सकती है, जिससे जल संकट बढ़ने की आशंका है।
- 012030 तक AI डेटा सेंटर्स की पानी की खपत 1.3 अरब लोगों की जरूरतों के बराबर होगी।
- 02AI के लिए बिजली की मांग 2025 में 20% से बढ़कर 2030 तक 40% तक पहुंच सकती है।
- 03AI फोकस्ड डेटा सेंटर्स को हर साल लगभग 945 TWh बिजली की आवश्यकता हो सकती है।
- 04AI के पर्यावरणीय प्रभाव में पानी की खपत पर कम ध्यान दिया गया है।
- 05पॉलिसी मेकर्स से पारिस्थितिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नई रणनीतियों पर काम करने का आग्रह किया गया है।
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यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता उपयोग जल संकट को बढ़ा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक AI से जुड़े डेटा सेंटर्स की पानी की खपत इतनी होगी कि यह लगभग 1.3 अरब लोगों की घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेगी, जो अफ्रीका की कुल आबादी के बराबर है। AI के लिए बिजली की मांग 2025 में 20% से बढ़कर 2030 तक 40% तक पहुंच सकती है, जिससे ऊर्जा की आवश्यकता 378 TWh तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा, AI डेटा सेंटर्स को हर साल लगभग 945 TWh बिजली की आवश्यकता हो सकती है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया की संयुक्त बिजली खपत से लगभग तीन गुना अधिक है। रिपोर्ट में पॉलिसी मेकर्स और टेक्नोलॉजी फर्मों से आग्रह किया गया है कि वे अपने इनोवेशन रणनीतियों में पारिस्थितिक प्रभाव को शामिल करें।
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AI के बढ़ते उपयोग से जल संकट बढ़ सकता है, जिससे 1.3 अरब लोगों की जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।
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