धर्मशाला कोर्ट ने नशे के मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
नशे के नेटवर्क की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी : कोर्ट
Amar Ujala
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धर्मशाला की विशेष अदालत ने 15 ग्राम चिट्टा बरामदगी के मामले में आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने हिरासत में पूछताछ को अनिवार्य बताया, यह कहते हुए कि नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।
- 01अदालत ने 15 ग्राम चिट्टा बरामदगी से जुड़े मामले में आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
- 02अदालत ने हिरासत में पूछताछ को अनिवार्य बताया, खासकर जब जांच प्रारंभिक चरण में हो।
- 03पुलिस ने 27 मई को गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी महिला के घर पर छापेमारी की।
- 04महिला चार बच्चों की मां है और उसने आरोप लगाया है कि उसे झूठा फंसाया गया है।
- 05अदालत ने कहा कि नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को तबाह कर रहा है।
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धर्मशाला में विशेष न्यायाधीश सपना पांडे की अदालत ने 15 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी से जुड़े मामले में आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के मामलों में, विशेषकर जब जांच प्रारंभिक चरण में हो, हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। पुलिस ने 27 मई को निहारी गांव की एक महिला के घर पर छापेमारी की, जिसमें 15 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। आरोपी महिला ने यह दावा किया कि वह चार बच्चों की मां है और उसे झूठा फंसाया गया है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने कहा कि महिला फरार है और नशे के नेटवर्क के संबंधों की जानकारी के लिए उसकी गहन पूछताछ जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है और अग्रिम जमानत सामान्यत: नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के लिए हैं और मुख्य मुकद्दमे के निर्णय पर कोई असर नहीं डालेंगी।
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इस निर्णय से नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत मिलता है, जिससे स्थानीय समुदाय में जागरूकता बढ़ेगी।
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