किताबों में टॉपर, लेकिन जिंदगी में कमजोर? आखिर JEE की तैयारी क्यों नहीं सिखाती असली दुनिया का खेल!
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देश में हर साल लाखों छात्र JEE परीक्षा पास करने का सपना देखते हैं. कई छात्र सालों तक कोचिंग और किताबों में डूबे रहते हैं ताकि IIT और बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन मिल सके. लेकिन अब कई छात्रों के अनुभव एक अलग तस्वीर दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि JEE की तैयारी सिर्फ फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स तक सीमित रह जाती है. इससे वे परीक्षा तो पास कर लेते हैं, लेकिन कॉलेज की असली जिंदगी और कॉर्पोरेट दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार नहीं हो पाते. कॉलेज पहुंचने के बाद उन्हें एहसास होता है कि असली दुनिया में सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन, टीमवर्क और आत्मविश्वास जैसी स्किल्स भी बेहद जरूरी होती हैं. क्या सिर्फ किताबें काफी हैं? JEE की तैयारी करने वाले ज्यादातर छात्र कई सालों तक सिर्फ PCM विषयों पर फोकस करते हैं. उनका पूरा रूटीन कोचिंग, टेस्ट और सवाल हल करने में निकल जाता है. ऐसे में खेल, सामाजिक गतिविधियां और व्यक्तित्व विकास जैसी चीजें पीछे छूट जाती हैं. कई छात्र बताते हैं कि कॉलेज पहुंचने के बाद उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि वे लोगों से खुलकर बात करने, प्रेजेंटेशन देने और टीम में काम करने में कमजोर हैं. यही वजह है कि अच्छे नंबर लाने वाले कई छात्र भी शुरुआत में आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ अकादमिक ज्ञान जीवन की हर चुनौती के लिए पर्याप्त नहीं होता. कॉलेज में क्यों बढ़ती है परेशानी? इंजीनियरिंग कॉलेज में पहुंचने के बाद माहौल पूरी तरह बदल जाता है. यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट, ग्रुप डिस्कशन, इंटरव्यू और नेटवर्किंग भी जरूरी होती है. कई छात्र बताते हैं कि JEE की तैयारी के दौरान उन्होंने सिर्फ अकेले पढ़ना सीखा, लेकिन कॉलेज में टीमवर्क सबसे अहम बन जाता है. कुछ छात्रों को अंग्रेजी में बातचीत करने और अपने विचार रखने में भी परेशानी होती है. यही कारण है कि कई बार पढ़ाई में तेज छात्र भी प्लेसमेंट और इंटर्नशिप के दौरान पीछे रह जाते हैं. धीरे-धीरे उन्हें समझ आता है कि करियर में सफलता के लिए टेक्निकल स्किल्स के साथ सॉफ्ट स्किल्स भी जरूरी हैं. सॉफ्ट स्किल्स क्यों जरूरी हैं? आज के समय में कंपनियां सिर्फ अच्छे अंक देखने के बजाय उम्मीदवार की पर्सनैलिटी और कम्युनिकेशन स्किल्स पर भी ध्यान देती हैं. इंटरव्यू में आत्मविश्वास, टीमवर्क और समस्या सुलझाने की क्षमता काफी मायने रखती है. कई छात्रों का कहना है कि JEE की तैयारी में उन्हें इन चीजों का अनुभव ही नहीं मिला. एक्सपर्ट्स के मुताबिक स्कूल और कोचिंग संस्थानों को अब बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना चाहिए. डिबेट, पब्लिक स्पीकिंग और ग्रुप एक्टिविटी जैसी चीजें छात्रों को असली दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकती हैं. इससे छात्र कॉलेज और नौकरी दोनों जगह ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करेंगे. क्या बदल रही है सोच? अब धीरे-धीरे शिक्षा को लेकर लोगों की सोच बदल रही है. कई पैरेंट्स और शिक्षक मानने लगे हैं कि सिर्फ परीक्षा पास करना ही सफलता नहीं है. बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान और लाइफ स्किल्स सिखाना भी जरूरी है. नई शिक्षा नीति में भी अनुभव आधारित शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर छात्रों को शुरू से ही पढ़ाई के साथ कम्युनिकेशन, नेतृत्व और भावनात्मक संतुलन जैसी स्किल्स सिखाई जाएं तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए ज्यादा तैयार होंगे. यही वजह है कि अब केवल किताबों की पढ़ाई नहीं, बल्कि ऑलराउंड डेवलपमेंट को भी सफलता की असली कुंजी माना जा रहा है.
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