खाड़ी देशों में भारतीय छात्रों की CBSE परीक्षा परिणाम पर चिंता
Indians in GCC: 'बस एक मौका दे दो प्लीज', गुहार लगा रहे खाड़ी देशों के भारतीय बच्चे और माता-पिता, सुने CBSE
Image: Nbt Navbharattimes
भारतीय छात्रों के लिए CBSE परीक्षा परिणाम खाड़ी देशों में एक बड़ी समस्या बन गया है, क्योंकि इजरायल-ईरान युद्ध के चलते 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। वैकल्पिक मूल्यांकन के कारण छात्रों को कम अंक मिले हैं, जिससे वे इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए अयोग्य हो गए हैं। माता-पिता और छात्र राहत की गुहार लगा रहे हैं।
- 01CBSE ने खाड़ी देशों में छात्रों के लिए 12वीं की परीक्षाएं रद्द कीं, जिसके बाद वैकल्पिक मूल्यांकन के तहत रिजल्ट जारी किए गए।
- 02DASA (डायरेक्ट एडमिशन ऑफ स्टूडेंट अब्रॉड) योजना के तहत छात्रों को 75% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, लेकिन कई छात्रों को कम अंक मिले हैं।
- 03इंडिया ओवरसीज फोरम (IOF) ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर छात्रों को राहत देने की मांग की है।
- 04छात्रों और माता-पिता ने CBSE से ग्रेस मार्क्स देने और कंपार्टमेंट एग्जाम का अवसर देने की अपील की है।
- 05IOF ने सरकार से 75% की शर्त को घटाकर 60% करने और दोबारा परीक्षा देने का विकल्प देने की मांग की है।
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खाड़ी देशों में भारतीय छात्रों के लिए CBSE परीक्षा परिणाम एक गंभीर समस्या बन गया है। इजरायल-ईरान युद्ध के चलते 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं, जिसके परिणामस्वरूप CBSE ने वैकल्पिक मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत रिजल्ट जारी किया। इस प्रक्रिया से छात्रों को मिले अंक उनकी वास्तविक क्षमता का सही आंकलन नहीं कर पा रहे हैं। इससे कई छात्रों को इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेने में कठिनाई हो रही है, क्योंकि DASA (डायरेक्ट एडमिशन ऑफ स्टूडेंट अब्रॉड) योजना के तहत उन्हें 75% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। माता-पिता और छात्र लगातार CBSE से राहत की गुहार लगा रहे हैं। इंडिया ओवरसीज फोरम (IOF) ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर विशेष छूट, अंक सुधार, और दोबारा परीक्षा देने के विकल्प की मांग की है। छात्रों का कहना है कि युद्ध के कारण उनकी तैयारी प्रभावित हुई और उन्हें उचित अंक नहीं मिले। यदि समय पर कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो हजारों छात्रों का करियर प्रभावित हो सकता है।
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If the CBSE does not address the concerns, many students may lose their chance for higher education in India, affecting their future career prospects.
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