भारत में घटने लगी बच्चों की आबादी, सिर्फ केवल 6 राज्यों में 'फर्टिलिटी रेट' रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में जनसंख्या संतुलन को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। साल 2024 की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। एक महिला अपने जीवनकाल में पैदा किए जाने वाले बच्चों की औसत संख्या (TFR) अब 2.1 के आदर्श स्तर से और घटकर 1.9 पर आ गई है। इस गिरावट के बाद अब देश के केवल छह राज्यों में ही प्रजनन दर आबादी को स्थिर बनाए रखने के जरूरी स्तर (रिप्लेसमेंट लेवल) से ऊपर बची है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सिर्फ छह राज्यों में प्रजनन दर 'रिप्लेसमेंट लेवल' (2.1) से ऊपर है। बिहार- यहां प्रजनन दर 2.9 है, जिसमें पिछले एक दशक में सबसे कम (महज 9.4%) गिरावट देखी गई है। उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ झारखंड क्या होता है रिप्लेसमेंट लेवल? जनसांख्यिकी विज्ञान में जब TFR 2.1 होता है, तो उसे 'रिप्लेसमेंट लेवल' कहा जाता है। इसका मतलब है कि माता-पिता की जगह नई पीढ़ी के बच्चे ले रहे हैं और आबादी स्थिर रहेगी। इससे नीचे स्कोर जाने का मतलब है कि भविष्य में जनसंख्या की वृद्धि दर धीमी होगी और धीरे-धीरे आबादी घटने लगेगी। दिल्ली में सबसे कम प्रजनन दर आंकड़ों के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में प्रजनन दर सबसे कम यानी 1.2 दर्ज की गई है। दिल्ली के बाद केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है, जहां TFR 1.3 है। जिन राज्यों में प्रजनन दर एक दशक पहले ही नीचे गिर गई थी, वहां बच्चों की संख्या तेजी से कम हुई है। जैसे- तमिलनाडु में बच्चों की आबादी कुल जनसंख्या की सिर्फ 18% बची है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 31.5% है। पूरे देश की बात करें तो भारत में औसतन 24% आबादी ही अब 0-14 वर्ष के आयु वर्ग में है। दूसरी तरफ, देश में बुजुर्गों (60 वर्ष से अधिक) की संख्या 8.6% से बढ़कर 9.7% हो गई है। केरल में सबसे अधिक बुजुर्ग आबादी (15%) है, जबकि तमिलनाडु में पिछले 10 वर्षों में बुजुर्गों की संख्या में सबसे बड़ा उछाल (10.6% से बढ़कर 14.2%) देखा गया है। असम में बुजुर्गों की आबादी सबसे कम (7.6%) है। कामकाजी आबादी में अभी भी बढ़ोतरी प्रजनन दर में आ रही इस कमी के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि देश की कामकाजी आबादी (15-59 वर्ष) का ग्राफ अभी भी ऊपर की ओर है। भारत की कुल आबादी का 66.4% हिस्सा कामकाजी उम्र का है, जो साल 2014 में 64% था। इसका मतलब है कि देश के विकास के लिए जरूरी 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' की खिड़की अभी बंद नहीं हुई है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि प्रजनन दर में इस ऐतिहासिक गिरावट के बावजूद भारत की कुल आबादी अभी तुरंत कम होना शुरू नहीं होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में इस समय युवाओं और प्रजनन आयु वर्ग के लोगों की संख्या बहुत बड़ी है। इस 'पापुलेशन मोमेंटम' के कारण आने वाले कुछ समय तक देश की जनसंख्या में वृद्धि जारी रहेगी, जिसके बाद यह स्थिरता की ओर बढ़ेगी। यह भी पढ़ें- कभी जिमखाना क्लब में भारतीयों की एंट्री थी लगभग बैन, नहीं मिलती थी सदस्यता
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