धनबाद के जंगलों में 75 वर्षीय सुरेंद्र सोरेन की अनोखी जीवन यात्रा
तपस्वी का वैराग्य: दो बेटों और पत्नी को खोया, तो 25 साल से धनबाद के घने जंगलों को ही बना लिया अपना संसार
Image: Nbt Navbharattimes
धनबाद के टुंडी क्षेत्र में 75 वर्षीय सुरेंद्र सोरेन ने 25 वर्षों से जंगलों में साधारण जीवन बिताया है। उन्होंने अपने दो बेटों और पत्नी को खोने के बाद पैसे और आधुनिकता से दूर रहकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उनका जीवन जंगल से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है।
- 01सुरेंद्र सोरेन ने 25 वर्षों से धनबाद के जंगलों में जीवन बिताया है, जहां उन्होंने अपनी पत्नी और दो बेटों को खोया।
- 02उनकी संपत्ति में केवल सूखी लकड़ियां, मिट्टी का चूल्हा और कुछ पुराने बर्तन शामिल हैं।
- 03सुरेंद्र ने बिना किसी आधुनिक उपकरण के अपने हाथों से 5-6 फीट गहरा कुआं खोदा।
- 04उनका मुख्य भोजन जंगल से मिलने वाले जंगली आलू, कंदमूल और जंगली चावल है।
- 05सुरेंद्र ने आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया, यह दर्शाते हुए कि वे आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हैं।
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धनबाद के टुंडी क्षेत्र में 75 वर्षीय सुरेंद्र सोरेन की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति ने आधुनिकता और भौतिकता से दूर रहकर अपनी जिंदगी को साधारण लेकिन स्वाभिमानी तरीके से जीने का निर्णय लिया। सुरेंद्र ने 25 वर्षों से घने जंगलों में जीवन बिताया है, जहां उन्होंने अपनी पत्नी और दो बेटों को खो दिया। उनकी संपत्ति में केवल सूखी लकड़ियां, मिट्टी का चूल्हा और कुछ पुराने बर्तन शामिल हैं। उन्होंने बिना किसी मशीन के अपने हाथों से 5-6 फीट गहरा कुआं खोदा और अपने दम पर एक छोटा सा खेत तैयार किया है। उनका मुख्य भोजन जंगल से मिलने वाले जंगली आलू, कंदमूल और जंगली चावल है। हाल ही में जब उन्हें आर्थिक मदद की पेशकश की गई, तो उन्होंने सादगी और दृढ़ता से पैसे लेने से इनकार कर दिया। यह उनकी आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक है।
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सुरेंद्र सोरेन की कहानी आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की मिसाल है, जो स्थानीय समुदाय को प्रेरित कर सकती है।
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