चंदन की खेती: एक लाभदायक निवेश और पर्यावरण संरक्षण का साधन
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है कीमत! एक बार लगा लिया ये पेड़ तो संवर जाएंगी पीढ़ियां, लाखों में मिलेगी कीमत
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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में चंदन, जिसे श्रीखंड कहा जाता है, धार्मिक और औषधीय उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी बढ़ती मांग और कीमतें इसे किसानों के लिए लाभदायक निवेश बनाती हैं। चंदन की लकड़ी की कीमत 100 रुपये प्रति किलो से शुरू होकर 32,500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
- 01श्रीखंड चंदन की लकड़ी की कीमत 100 रुपये प्रति किलो से शुरू होकर 32,500 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है।
- 02चंदन का उपयोग धार्मिक, सांस्कृतिक और औषधीय कार्यों में किया जाता है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
- 03चंदन की खेती से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि इसकी वृद्धि में कई वर्ष लगते हैं।
- 04सरकार चंदन की कटाई और बिक्री पर नियंत्रण रखती है ताकि अवैध तस्करी रोकी जा सके।
- 05चंदन का उपयोग इत्र, साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग बनी रहती है।
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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में चंदन, जिसे स्थानीय भाषा में श्रीखंड कहा जाता है, अपनी अनोखी खुशबू और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह धार्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसकी लकड़ी की कीमतें 100 रुपये प्रति किलो से शुरू होकर 32,500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं। चंदन की मांग देशभर में बढ़ रही है, जिससे यह किसानों के लिए एक लाभदायक निवेश बन रहा है। इसकी खेती में कई वर्ष लगते हैं, लेकिन एक बार तैयार होने पर यह अच्छी कीमत दिला सकता है। चंदन का उपयोग न केवल धार्मिक आयोजनों में, बल्कि इत्र, साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बनी रहती है। हालांकि, इसकी कटाई और बिक्री पर सरकारी नियंत्रण है, ताकि अवैध तस्करी को रोका जा सके। चंदन का पेड़ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इसके रोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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चंदन की खेती से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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