दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरधार्मिक संबंधों पर टिप्पणी करते हुए दुष्कर्म आरोपी को बरी किया
'अंतरधार्मिक रिश्तों में समाज का मतभेद बनता है बाधा', दिल्ली HC ने टिप्पणी कर दुष्कर्म आरोपी को बरी किया

Image: Jagran
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मुस्लिम युवक को 2008 में नाबालिग प्रेमिका के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। न्यायालय ने कहा कि भारतीय समाज में अंतरधार्मिक संबंधों को लेकर गहरे मतभेद हैं, जो युवा प्रेमियों के लिए चुनने की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में अंतरधार्मिक संबंधों में गहरा मतभेद है।
- 02न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा कि परिवार के दबाव के कारण युवाओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ सकती है।
- 03लड़की ने अपने परिवार के दबाव में झूठा आरोप लगाया था, जबकि वह घटना के समय बालिग थी।
- 04युवक और पीड़िता ने विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत शादी की थी।
- 052008 में ट्रायल कोर्ट ने युवक को दोषी ठहराया था, जिसे उच्च न्यायालय ने चुनौती दी थी।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मुस्लिम युवक को 2008 में नाबालिग प्रेमिका के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने टिप्पणी की कि भारतीय समाज में अंतरधार्मिक संबंधों को लेकर गहरे मतभेद हैं, जो युवा प्रेमियों के लिए अपने साथी चुनने की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, युवा प्रेमियों को परिवार के दबाव का सामना करना पड़ता है, जिससे कई बार उन्हें अपनी जान भी गंवानी पड़ती है। कोर्ट ने यह भी पाया कि हिंदू लड़की घटना के दौरान बालिग थी और उसने अपने परिवार के दबाव में युवक पर झूठा आरोप लगाया था। याचिका के अनुसार, युवक और पीड़िता ने 2004 में भागकर बंगाल में शादी की थी, लेकिन बाद में लड़की के पिता ने युवक पर नाबालिग बेटी को अगवा करने का आरोप लगाया। 2008 में ट्रायल कोर्ट ने युवक को दोषी ठहराया था, जिसे उच्च न्यायालय ने चुनौती दी।
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इस निर्णय से अंतरधार्मिक संबंधों में सामाजिक बाधाओं को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और युवाओं को अपने साथी चुनने की स्वतंत्रता पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगी।
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