इंडोनेशिया के तोराजा समुदाय की अनोखी अंतिम संस्कार परंपरा
मरे हुए परिजनों को खिलाते हैं खाना, करते हैं बात और... इस जनजाति की परंपरा सुन कांप उठेंगे आप
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इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर रहने वाले तोराजा समुदाय की अंतिम संस्कार परंपरा बेहद अनोखी है। वे मृतकों को 'बीमार' मानते हैं और शवों का ध्यान रखते हैं, जिससे वे महीनों तक घर में रहते हैं। अंतिम संस्कार समारोह 'राम्बू सोलो' में भैंसों की बलि दी जाती है, जो मृत आत्मा को परलोक पहुंचाने का काम करती है।
- 01तोराजा समुदाय में मृतक को तुरंत मृत नहीं माना जाता, बल्कि उसे 'मकूला' यानी बीमार माना जाता है।
- 02शव को सुरक्षित रखने के लिए खास जड़ी-बूटियों और रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।
- 03अंतिम संस्कार समारोह 'राम्बू सोलो' तीन से दस दिनों तक चलता है और इसमें भैंसों की बलि दी जाती है।
- 04तोराजा लोग शवों को ऊंची चट्टानों और गुफाओं में रखते हैं, न कि जमीन में।
- 05कब्रों के बाहर लकड़ी के पुतले 'ताऊ-ताऊ' लगाए जाते हैं, जिन्हें पूर्वजों का आशीर्वाद माना जाता है।
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इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर तोराजा समुदाय की अंतिम संस्कार परंपरा अद्वितीय और भिन्न है। यहां किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे तुरंत मृत नहीं माना जाता, बल्कि परिवार के सदस्य उसे 'मकूला' यानी बीमार मानते हैं। शव को घर में रखकर उसकी देखभाल की जाती है, जिसमें खाना-पानी देना और कपड़े बदलना शामिल है। इस प्रक्रिया में शव को महीनों और कभी-कभी सालों तक सुरक्षित रखा जाता है, इसके लिए विशेष जड़ी-बूटियों और रसायनों का उपयोग किया जाता है। अंतिम संस्कार समारोह जिसे 'राम्बू सोलो' कहा जाता है, तीन से दस दिनों तक चलता है और इसमें भैंसों की बलि दी जाती है। यह बलि मृत आत्मा को परलोक तक पहुंचाने का कार्य करती है। तोराजा लोग शवों को ऊंची चट्टानों और गुफाओं में दफनाते हैं, और कब्रों के बाहर लकड़ी के पुतले 'ताऊ-ताऊ' रखते हैं, जो परिवार की रक्षा करते हैं। इस पूरी परंपरा में आर्थिक मदद भी शामिल होती है ताकि मृतक को सम्मानजनक विदाई दी जा सके।
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यह परंपरा तोराजा समुदाय के सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है और उनके जीवन के अंतिम चरण को सम्मानित करने का एक तरीका है।
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