युवाओं को गुमराह कर गैंग से जोड़ने की साजिश, पाकिस्तानी गैंग के निशाने पर बिहार? मो. मुस्तफा केस में कई राज्यों तक फैली जांच
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पटना. बिहार पुलिस की आतंकवाद-रोधी दस्ते (Anti-Terrorism Squads) यानी एटीएस (ATS) ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है. एटीएस की टीम ने उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के गरहा थाना क्षेत्र स्थित रतनपुरा गांव में गुप्त इनपुट के आधार पर छापेमारी की थी. इस कार्रवाई में मोहम्मद मुस्तफा नाम के एक 22 वर्षीय युवक को देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. जांच में सामने आया है कि मुस्तफा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीधे तौर पर सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था. इस गिरफ्तारी के बाद से सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. अत्याधुनिक हथियार का लालच और भट्टी गैंग का जाल जांच अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद मुस्तफा पाकिस्तान के कुख्यात हथियार तस्कर और गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी राणा हुनैन के सीधे संपर्क में था. मुस्तफा को अत्याधुनिक और खतरनाक हथियार पाने का बेहद शौक और लालच था. पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी ने उसकी इसी कमजोरी को भांप लिया और उसे हथियारों का लालच देकर देश के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. हथियार पाने के अंधी चाहत में मुस्तफा इस कदर गुमराह हुआ कि उसने देश की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया. सैन्य कैंपों की रेकी और संवेदनशील डेटा ट्रांसफर पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर मुस्तफा ने मुजफ्फरपुर में स्थित सशस्त्र सीमा बल (SSB) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कैंपों की रेकी की थी. उसने इन बेहद संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड किए थे. इसके बाद उसने व्हाट्सएप और अन्य एन्क्रिप्टेड चैट बैकअप टूल्स का उपयोग कर इन वीडियो, सटीक जियोग्राफिकल लोकेशन और खुफिया जानकारियों को पाकिस्तानी गैंग को ट्रांसफर कर दिया. जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतों द्वारा किसी बड़ी अप्रिय घटना को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था. युवाओं की भर्ती और डिजिटल साक्ष्य पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी ने मुस्तफा को सिर्फ जासूसी तक ही सीमित नहीं रखा था. उसे स्थानीय स्तर पर अन्य सीधे-साधे युवाओं को बरगलाने, उन्हें गुमराह करने और भट्टी गैंग में शामिल करने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी गई थी. एटीएस की तकनीकी टीम ने मुस्तफा के मोबाइल को जब्त कर जब डिजिटल फॉरेंसिक जांच की, तो उसमें से कई डिलीट किए गए डेटा, चैट बैकअप और भारत विरोधी आपत्तिजनक डिजिटल फाइलें रिकवर की गईं. इन साक्ष्यों से साफ होता है कि भट्टी गैंग इंटरनेट मीडिया के जरिए भारत के अलग-अलग राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में भी इसी तरह युवाओं को जाल में फंसाकर अपना देश विरोधी मॉड्यूल खड़ा करने की कोशिश कर चुका है. केंद्रीय एजेंसियां सतर्क और एटीएस का बड़ा एक्शन मुस्तफा के मोबाइल से मिले देश विरोधी सबूतों की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियां (जैसे एनआईए और आईबी) पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं. एटीएस की जांच की सूई अब उन अन्य गुमराह युवाओं की पहचान करने की तरफ घूम गई है, जो इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं. एटीएस फिलहाल मुस्तफा के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), सोशल मीडिया प्रोफाइल और बैंक ट्रांजैक्शन के साथ-साथ उसकी ट्रैवल हिस्ट्री को भी खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे इस काम के लिए कोई विदेशी फंडिंग मिल रही थी या नहीं. आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कड़ी पूछताछ की जा रही है.
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