मंडी के नेरचौक मेडिकल कॉलेज में 'Dogesh Gang' की दहशत, OPD से वार्ड तक डर के साए में मरीज
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मंडी जिला के नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एक बार फिर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में आ गया है. अस्पताल जहां गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अब अस्पताल परिसर में घूम रहे दर्जनों आवारा कुत्ते लोगों के लिए चिंता और डर का कारण बनते जा रहे हैं. मरीजों, तीमारदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. अस्पताल में आवारा कुत्तों का जमावड़ा बताया जा रहा है कि अस्पताल के मुख्य द्वार, पार्किंग क्षेत्र, ओपीडी ब्लॉक, वार्डों के आसपास और कैंटीन क्षेत्र में दिनभर कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है. कई बार ये कुत्ते मरीजों और उनके परिजनों के पीछे दौड़ते भी देखे गए हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है. खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को अस्पताल परिसर में आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई बार अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के घूमने और लोगों पर झपटने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. बावजूद इसके प्रशासन और संबंधित विभाग समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे. लोगों का आरोप है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर सफाई व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कुत्ते कर चुके हैं लोगों पर हमला लोगों का यह भी कहना है कि एक ओर अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परिसर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या व्यवस्था की पोल खोल रही है. मरीजों का कहना है कि अस्पताल इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां पहुंचने पर डर का माहौल देखने को मिलता है. यदि किसी मरीज या बच्चे पर कुत्तों ने हमला कर दिया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है. प्रशासन से मांग अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचे कई लोगों ने प्रशासन से मांग उठाई है कि जल्द से जल्द अस्पताल परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए अभियान चलाया जाए. साथ ही नगर परिषद और संबंधित विभागों को भी इस दिशा में गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके. अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता से लेते हैं, क्योंकि अस्पताल जैसी जगह पर सुरक्षा और स्वच्छता दोनों बेहद जरूरी हैं. यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है.
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