पश्चिम बंगाल में बकरीद पर गाय की कुर्बानी पर रोक, सऊदी अरब के नियमों की तुलना
पश्चिम बंगाल में बकरीद पर नहीं दी जाएगी गाय की कुर्बानी, सऊदी अरब में इसे लेकर क्या हैं नियम?
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Image: Jagran
पश्चिम बंगाल की सरकार ने 1950 के पशु वध नियंत्रण अधिनियम को लागू करते हुए गाय की कुर्बानी पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। सऊदी अरब में भी कोरोना काल के दौरान गाय और ऊंटों की कुर्बानी पर रोक लगाई गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
- 01पश्चिम बंगाल में गाय या भैंस की कुर्बानी के लिए सरकारी पशु चिकित्सक की अनुमति आवश्यक है।
- 02गाय या भैंस को तभी मारा जा सकता है जब उसकी उम्र 14 साल से अधिक हो या वह शारीरिक रूप से अक्षम हो।
- 03हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि ईद-उल-अजहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
- 04सऊदी अरब में कोरोना काल के दौरान गाय और ऊंटों की कुर्बानी पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अब यह पाबंदी समाप्त हो चुकी है।
- 05सऊदी अरब में खुले में पशुओं की कुर्बानी देना भी बैन है।
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पश्चिम बंगाल की सरकार ने 1950 के पशु वध नियंत्रण अधिनियम को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत गाय और भैंस की कुर्बानी पर रोक लगा दी गई है। शुभेंदु अधिकारी की सरकार के नए आदेश के अनुसार, बिना सरकारी पशु चिकित्सक की अनुमति के गाय या भैंस का वध नहीं किया जा सकता। इस आदेश के खिलाफ कुछ मुस्लिम संगठनों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि इससे बकरीद पर कुर्बानी नहीं हो पाएगी। हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इसके अलावा, सऊदी अरब में भी कोरोना काल के दौरान गाय और ऊंटों की कुर्बानी पर रोक लगाई गई थी, लेकिन यह पाबंदी अब समाप्त हो चुकी है। सऊदी अरब में खुले में पशुओं की कुर्बानी देना भी बैन है, जो लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए किया गया था।
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इस फैसले से बकरीद पर मुस्लिम समुदाय को कुर्बानी करने में कठिनाई होगी।
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