मां मुंडेश्वरी मंदिर: अनोखी बलि परंपरा और आरती का समय
मां मुंडेश्वरी मंदिर: जहां बिना काटे दी जाती है बकरे की बलि, जानिए रहस्य और आरती का समय
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मां मुंडेश्वरी मंदिर, कैमूर जिले के पवरा पहाड़ी पर स्थित है, जहां बिना काटे बकरों की बलि दी जाती है। यह मंदिर धार्मिक आस्था का केंद्र है, जहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर सुबह 6:00 बजे खुलता है, और आरती के समय विशेष रूप से भीड़ होती है।
- 01मां मुंडेश्वरी मंदिर की ऊंचाई लगभग 600 फीट है और यह अष्टकोणीय संरचना है।
- 02यहां बलि की प्रक्रिया में बकरा पहले मूर्छित होता है और फिर मंत्रोच्चार के बाद उठता है।
- 03मंदिर में मंगला आरती सुबह 6:30 बजे, मध्यान आरती 11:30 बजे, और संध्या आरती शाम 6:00 बजे होती है।
- 04स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, माता मुंडेश्वरी ने चण्ड और मुण्ड नामक दैत्यों का वध किया था।
- 05मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क और सीढ़ी दोनों मार्ग उपलब्ध हैं, जिससे बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सुविधा होती है।
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मां मुंडेश्वरी मंदिर, जो कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड की पवरा पहाड़ी पर स्थित है, अपनी प्राचीनता और अनोखी बलि परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर लगभग 600 फीट की ऊंचाई पर है और इसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम माना जाता है। यहां परंपरागत तरीके से बकरों की बलि दी जाती है, जिसमें बकरा पहले मूर्छित होता है और फिर मंत्रोच्चार के बाद उठता है। मंदिर सुबह 6:00 बजे खुलता है, और आरती का समय सुबह 6:30 बजे, दोपहर 11:30 बजे, और शाम 6:00 बजे निर्धारित है। श्रद्धालुओं का मानना है कि माता की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह मंदिर धीरे-धीरे विश्वविख्यात धार्मिक स्थल के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है।
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मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, जिससे आसपास के व्यवसायों को लाभ हो रहा है।
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