भारत-अमेरिका संबंधों में नई मजबूती: रक्षा से AI तक सहयोग
रक्षा से लेकर AI तक... भारत-अमेरिका संबंधों में नई मजबूती, जयशंकर ने दिया 'मेक इन इंडया' पर जोर
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Image: Jagran
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने 'मेक इन इंडिया' नीति को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा, व्यापार, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने का संकल्प लिया।
- 01भारत और अमेरिका ने 10 साल के रक्षा साझेदारी समझौते को फिर से लागू किया है।
- 02जयशंकर ने कहा कि भारत के 140 करोड़ लोगों को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
- 03अगले दशक में सैन्य सहयोग को नई दिशा देने के लिए एडीएमएम-प्लस बैठक में इस रक्षा साझेदारी ढांचे पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- 04जयशंकर ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 05मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का रणनीतिक सहयोगी बताया और दोनों देशों के संबंधों को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की बात की।
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नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की गई। जयशंकर ने बताया कि हाल ही में 10 साल के बड़े रक्षा साझेदारी समझौते को फिर से लागू किया गया है, और अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' नीति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में रक्षा सहयोग बढ़ाते समय हाल के युद्धों से मिले अनुभवों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर भी चर्चा हुई, जिसमें भारत के 140 करोड़ नागरिकों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने की प्राथमिकता को रेखांकित किया गया। इसके अलावा, जयशंकर ने परमाणु ऊर्जा सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में सहयोग पर भी बात की। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का रणनीतिक सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल क्षेत्रीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हैं।
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भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग से भारतीय नागरिकों को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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