मोदी सरकार के 12 वर्षों में वित्तीय व्यवस्था में डिजिटल बदलाव
12 साल बेमिसाल; जानिए कैसे मोदी सरकार ने इन बदलावों से पूरी तरह बदल दिया पैसे खर्च करने का तरीका?

Image: Zee News
मोदी सरकार के 12 वर्षों में 'डिजिटल इंडिया' पहल ने वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। JAM ट्रिनिटी और UPI के माध्यम से करोड़ों लोगों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ा गया, जिससे नकद पर निर्भरता कम हुई और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा।
- 01डिजिटल इंडिया पहल ने तकनीकी और आर्थिक बदलाव को प्रेरित किया।
- 02JAM (जनधन-आधार-मोबाइल) ट्रिनिटी के जरिए करोड़ों लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया।
- 03UPI लॉन्च होने से डिजिटल भुगतान में तेजी आई और छोटे व्यवसायों ने इसे अपनाया।
- 04डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) ने सरकारी सहायता को सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाया।
- 05भारत ने नकदी आधारित अर्थव्यवस्था से डिजिटल भुगतान प्रणाली की ओर महत्वपूर्ण प्रगति की।
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नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्षों में 'डिजिटल इंडिया' पहल ने भारत की वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। इस पहल के तहत वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया गया, जिससे करोड़ों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ा गया। JAM (जनधन-आधार-मोबाइल) ट्रिनिटी के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान हुई। 2016 में लॉन्च किया गया UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने डिजिटल भुगतान को सरल बनाया, जिससे छोटे व्यवसायियों ने भी इसका उपयोग करना शुरू किया। इसके साथ ही, मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजना शुरू किया, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई। इन सभी पहलों के परिणामस्वरूप, भारत ने नकद आधारित अर्थव्यवस्था से डिजिटल भुगतान आधारित व्यवस्था की ओर महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह बदलाव न केवल लोगों की भुगतान आदतों में बदलाव लाया है, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था को भी नई दिशा दी है।
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डिजिटल भुगतान के बढ़ने से छोटे व्यवसायों को लाभ हुआ और नकद पर निर्भरता कम हुई।
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