भारत की प्रजनन दर में गिरावट: पड़ोसी देशों की स्थिति और संभावित प्रभाव
Explainer: भारत के लिए बज गई खतरे की घंटी, प्रजनन दर में गिरावट; पड़ोसी देशों में कैसे हैं हाल?
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भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.9 हो गई है, जो दर्शाता है कि महिलाएं पहले की तुलना में कम बच्चे पैदा कर रही हैं। यह गिरावट देश के जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जिससे बुजुर्ग आबादी में वृद्धि हो सकती है। पड़ोसी देशों जैसे चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति भी चिंताजनक है, जिससे भारत को सबक लेने की आवश्यकता है।
- 01भारत में परिवारों की औसत संख्या अब 1-2 बच्चों तक सीमित हो गई है, जबकि पहले यह 3-4 बच्चे होते थे।
- 02आंध्र प्रदेश ने तीसरे और चौथे बच्चे वाले परिवारों के लिए वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है।
- 03चीन की जन्म दर घटकर प्रति 1,000 लोगों पर 5.63 रह गई है, जो 1968 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
- 04पाकिस्तान की जन्म दर 3.5 है, जो भारत से अधिक है, जबकि बांग्लादेश ने इसे 2.1 के स्तर पर नियंत्रित किया है।
- 05विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत की प्रजनन दर में गिरावट जारी रहती है, तो यह आर्थिक और सामाजिक संरचना पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।
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भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) अब घटकर 1.9 पर पहुंच गई है, जो दर्शाता है कि महिलाएं पहले की तुलना में कम बच्चे पैदा कर रही हैं। यह गिरावट विभिन्न सामाजिक-आर्थिक कारणों जैसे बढ़ती जीवन लागत, देर से विवाह और शहरीकरण से संबंधित है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, अब अधिकतर परिवार 1 या 2 बच्चों तक सीमित हो चुके हैं, जबकि पहले यह संख्या 3-4 थी। आंध्र प्रदेश ने तीसरे और चौथे बच्चे वाले परिवारों को वित्तीय सहायता देने की योजना बनाई है।
पड़ोसी देशों की स्थिति भी चिंताजनक है। चीन में जन्म दर घटकर प्रति 1,000 लोगों पर 5.63 रह गई है, जो 1968 के बाद का सबसे निचला स्तर है। पाकिस्तान की जन्म दर 3.5 है, जबकि बांग्लादेश ने इसे 2.1 के स्तर पर नियंत्रित किया है। यदि भारत की प्रजनन दर में गिरावट जारी रहती है, तो इससे बुजुर्ग आबादी में वृद्धि और कार्यबल में कमी हो सकती है, जो देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव डाल सकती है।
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यदि प्रजनन दर में गिरावट जारी रहती है, तो यह भारत में बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि और कार्यबल में कमी का कारण बन सकती है।
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