भारत सरकार ने एनएलसी इंडिया में 3% हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया
NLC India में 3% हिस्सेदारी क्यों बेच रही सरकार? बोरवेल से निकली 'काली मिट्टी' से पैदा हुई कंपनी की पूरी कहानी

Image: News 18 Hindi
भारत सरकार ने एनएलसी इंडिया (NLC India) में अपनी 3% हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है, जिससे उसे लगभग 1,200 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। यह बिक्री 9 जून से नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए और 10 जून से रिटेल निवेशकों के लिए शुरू होगी।
- 01एनएलसी इंडिया की मार्केट वैल्यू 45,523.28 करोड़ रुपये है।
- 02सरकार ने 4.16 करोड़ शेयर बेचने का निर्णय लिया है, फ्लोर प्राइस 303 रुपये प्रति शेयर है।
- 03एनएलसी इंडिया की स्थापना 1956 में हुई थी, जिसका उद्देश्य लिग्नाइट का खनन और बिजली उत्पादन करना है।
- 04कंपनी की शुरुआत एक किसान द्वारा की गई लिग्नाइट की खोज से हुई थी।
- 051957 में जर्मनी की तकनीक और सोवियत संघ के सहयोग से कंपनी ने बिजली उत्पादन शुरू किया।
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भारत सरकार ने एनएलसी इंडिया (NLC India) में अपनी 3% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है, जिससे उसे लगभग 1,200 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। यह बिक्री प्रक्रिया 9 जून से नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए और 10 जून से रिटेल निवेशकों के लिए शुरू होगी। एनएलसी इंडिया की मार्केट वैल्यू 45,523.28 करोड़ रुपये है और इसके तहत 4.16 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। इस कंपनी की स्थापना 1956 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लिग्नाइट का खनन और उससे बिजली उत्पादन करना है। यह कहानी एक किसान द्वारा लिग्नाइट की खोज से शुरू हुई, जिसने अपनी जमीन पर बोरवेल खोदने पर इस खनिज को खोज निकाला। इसके बाद, 1957 में जर्मनी की तकनीक और सोवियत संघ के सहयोग से कंपनी ने बिजली उत्पादन की प्रक्रिया शुरू की। एनएलसी इंडिया अब तमिलनाडु राज्य को बिजली प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से एनएलसी इंडिया की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा और इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
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