भारत में एआई के लिए नए कानून की आवश्यकता: अश्विनी वैष्णव
एआई की दुनिया आईटी अधिनियम के दौर से बहुत अलग, नए कानून की जरूरतः अश्विनी वैष्णव

Image: Jagran
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत को एआई के तेजी से बदलते परिदृश्य के मद्देनजर नए कानून की आवश्यकता है। मौजूदा आईटी अधिनियम 2000 का है, जो अब पुराने हो चुका है। सरकार उद्योग के साथ चर्चा कर रही है ताकि नवाचार और नागरिकों की सुरक्षा का संतुलन बना रहे।
- 01अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मौजूदा आईटी अधिनियम 2000 में लागू किया गया था, जब एआई का वर्तमान स्वरूप मौजूद नहीं था।
- 02सरकार एआई के नियमन के लिए नए कानून की आवश्यकता महसूस कर रही है, जिससे तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
- 03फरवरी में केंद्र सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफार्मों के लिए एआई-जनित सामग्री से संबंधित नियमों को सख्त किया।
- 04सरकार ने डीपफेक या एआई-जनित भ्रामक सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है।
- 05वैष्णव ने सेंसरशिप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई केवल डीपफेक कंटेंट पर सीमित है।
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केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि भारत को एआई के तेजी से बदलते परिदृश्य के मद्देनजर नए कानून की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने बताया कि मौजूदा आईटी अधिनियम, जो 2000 में लागू हुआ था, अब एआई जैसी तकनीकों के लिए उपयुक्त नहीं है। वैष्णव ने कहा कि सरकार इस विषय पर उद्योग के साथ चर्चा कर रही है और निर्णय सोच-समझकर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। फरवरी में, केंद्र सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफार्मों के लिए एआई-जनित सामग्री से संबंधित नियमों को सख्त किया, जिसमें डीपफेक सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य किया गया। वैष्णव ने सेंसरशिप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी कार्रवाई केवल डीपफेक कंटेंट पर सीमित है, और वैध सामग्री पर कोई रोक नहीं है।
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नए नियमों से ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर एआई-जनित सामग्री की निगरानी बढ़ेगी।
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