धनबाद में ग्राउंड वाटर प्रदूषण से बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित
धनबाद के ग्राउंड वाटर में स्लो प्वाइजन, देर से हो रहा बच्चों का मानसिक विकास
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Image: Jagran
धनबाद के बलियापुर प्रखंड के घड़बड़ गांव में ग्राउंड वाटर में फ्लोराइड की मात्रा मानक से कई गुना अधिक है, जिससे बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। शोध में पाया गया कि 67% बच्चों का आईक्यू औसत स्तर पर है।
- 01315 जल स्रोतों में से 36% में फ्लोराइड की मात्रा WHO मानक से अधिक है।
- 02घड़बड़ गांव में फ्लोराइड संदूषण का सूचकांक सबसे ऊंचा है, जहां 67% जल स्रोत प्रदूषित हैं।
- 0350% स्कूली बच्चे डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस से पीड़ित पाए गए।
- 04बच्चों के मूत्र में फ्लोराइड की सांद्रता 21 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
- 05शोधकर्ताओं ने फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने और जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की है।
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धनबाद के बलियापुर प्रखंड की घड़बड़ ग्राम पंचायत में ग्राउंड वाटर में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जिससे बच्चों का मानसिक विकास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। हाल ही में अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में यह बताया गया है कि 315 जल स्रोतों में से 36% में फ्लोराइड की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक है। विशेष रूप से घड़बड़ गांव में यह समस्या अधिक गंभीर है, जहां 67% जल स्रोत प्रदूषित पाए गए। अध्ययन में शामिल बच्चों के 50% में डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस के लक्षण पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस स्थिति से आने वाली पीढ़ी में मानसिक मंदता और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके समाधान के लिए फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने और सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की गई है।
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धनबाद के बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, जिससे उनकी शिक्षा और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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