राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर ने सेबी के आरोपों को खारिज किया
'सेबी ने खातों को गलत समझा', राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर ने फंड की हेराफेरी के आरोपों को खारिज किया

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राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने सेबी द्वारा फंड हेराफेरी के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कंपनी ने सभी लेन-देन सही तरीके से किए हैं। उन्होंने कहा कि सेबी ने गलत तरीके से अकाउंटिंग एंट्री को समझा है, जिससे कंपनी की 18,100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना पर खतरा मंडरा रहा है।
- 01राजेश मेहता ने सेबी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई फंड हेराफेरी नहीं हुई है।
- 02सेबी के आदेश में एसीसी एनर्जी और एलेस्ट के बीच फंड ट्रांसफर पर सवाल उठाए गए हैं।
- 03कंपनी की 18,100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना पर खतरा है, जिससे भारी उद्योग मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
- 04राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में कारोबार पर रोक लगा दी गई है और फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया गया है।
- 05कंपनी ने अनुसंधान एवं विकास में देरी के चलते एक साल का अतिरिक्त समय मांगा है।
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राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने मंगलवार को अपनी कंपनी पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा लगाए गए फंड हेराफेरी के आरोपों को खारिज किया। मेहता ने कहा कि सेबी ने कंपनी की अकाउंटिंग एंट्री को सही तरीके से नहीं समझा है। उन्होंने बताया कि एसीसी एनर्जी और प्रवर्तक के नियंत्रण वाली एलेस्ट प्राइवेट लि. के बीच फंड ट्रांसफर पर सेबी ने सवाल उठाए हैं, जिसके कारण कंपनी को 18,100 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक रसायनिक सेल उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना से बाहर होने का खतरा है। सेबी ने मेहता को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में कारोबार करने से रोक दिया है और फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है। मेहता ने कहा कि कंपनी ने अनुसंधान एवं विकास में देरी के कारण एक साल का अतिरिक्त समय मांगा है और बताया कि कर्नाटक के हुबली में एसीसी बैटरी प्लांट 60-65 फीसदी पूरा हो चुका है।
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कंपनी की प्रोत्साहन योजना पर खतरा होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास पर प्रभाव पड़ेगा।
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