दहेज के कारण तीन महिलाओं की मौत: समाज और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल
दीपिका, ट्विशा और पलक... दहेज के लिए खत्म हुईं तीन जिंदगियां!

Image: Aaj Tak
इस महीने भोपाल, नोएडा और ग्वालियर में दहेज के लिए तीन महिलाओं, ट्विशा शर्मा, दीपिका नागर और पलक रंजन की मौत ने भारतीय समाज में दहेज प्रथा और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 2024 में 5,737 दहेज हत्याएं दर्ज हुईं, जो प्रति दिन औसतन 16 महिलाओं की मौत को दर्शाती हैं।
- 01ट्विशा शर्मा, दीपिका नागर और पलक रंजन की मौतें दहेज के लिए हुई प्रताड़ना का परिणाम हैं।
- 022024 में भारत में 5,737 दहेज हत्याएं दर्ज हुईं, जो 2023 की तुलना में कम हैं लेकिन फिर भी चिंताजनक हैं।
- 03ट्विशा ने अपनी मां से संपर्क कर घर लौटने की गुहार लगाई थी, जबकि दीपिका ने अपने पिता को दहेज के लिए मारपीट की शिकायत की थी।
- 04विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक दबाव महिलाओं को रिश्तों से बाहर निकलने से रोकता है।
- 05कम दोषसिद्धि दर और लंबी कानूनी प्रक्रिया दहेज हत्याओं के मामलों में न्याय की गति को धीमा कर देती है।
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इस महीने दहेज के लिए तीन महिलाओं की मौत ने भारतीय समाज में दहेज प्रथा और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोपाल की ट्विशा शर्मा, नोएडा की दीपिका नागर और ग्वालियर की पलक रंजन की मौतें दहेज के लिए हुई प्रताड़ना के कारण हुईं। ट्विशा की शादी को केवल पांच महीने हुए थे और उसने अपनी मां से घर लौटने की गुहार लगाई थी। दीपिका ने अपने पिता को फोन कर दहेज के लिए हो रही मारपीट की शिकायत की, और पलक ने भी अपने भाई से बात की थी। 2024 में भारत में 5,737 दहेज हत्याएं दर्ज हुईं, जो हर दिन औसतन 16 महिलाओं की मौत को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक दबाव और न्याय व्यवस्था की धीमी गति महिलाओं को सुरक्षित महसूस करने से रोकती है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक परीक्षणों की आवश्यकता है ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय समाज में महिलाएं अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस कर सकती हैं?
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यह घटनाएं भारतीय समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दर्शाती हैं।
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