झारखंड में शिशु मृत्यु दर में सुधार: 29 से घटकर 27
शिशु स्वास्थ्य में झारखंड ने भरी उड़ान: मृत्यु दर 29 से घटकर 27 हुई, क्या कहते हैं ताजा आंकड़े
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झारखंड में शिशु मृत्यु दर (IMR) में सुधार हुआ है, जो पिछले वर्ष 29 से घटकर 27 हो गया है। शहरी क्षेत्रों में सुधार अधिक देखा गया है, जहां दर 21 से घटकर 18 हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 31 से 29 हुई है। हालांकि, अभी भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच असमानता बनी हुई है।
- 01झारखंड में शिशु मृत्यु दर में एक दशक में 27.8 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
- 02ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर 31 से घटकर 29 हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 21 से घटकर 18 हो गई है।
- 03लैंगिक असमानता के चलते मेल शिशुओं की मृत्यु दर 26 है, जबकि फीमेल की 27 है।
- 04रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में शिशु मृत्यु दर का अनुमान 2012-24 में 37.4 प्रतिशत था, जो अब घटकर 27 हो गया है।
- 05देशभर में शिशु मृत्यु दर में एक दशक में 40.6 से घटकर 25.4 होने का आंकड़ा है।
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झारखंड में रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) -2024 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में शिशु मृत्यु दर (IMR) में सुधार हुआ है। यह दर पिछले वर्ष 29 से घटकर 27 हो गई है, जो शिशुओं के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार को दर्शाता है। हालांकि, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुधार की दर में असमानता बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर 31 से घटकर 29 हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह दर 21 से घटकर 18 हो गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि शहरी क्षेत्रों में सुधार अधिक हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार को शिशु स्वास्थ्य योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। लैंगिक असमानता भी देखी जा रही है, जहां मेल शिशुओं की मृत्यु दर 26 और फीमेल की 27 है। एक दशक में झारखंड में शिशु मृत्यु दर में 27.8 प्रतिशत का सुधार हुआ है, जबकि पूरे देश में यह दर 40.6 से घटकर 25.4 हो गई है।
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शिशु स्वास्थ्य में सुधार से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में शिशुओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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