रूपेश संघवी की कहानी: एयरलाइंस से प्लास्टिक मुक्ति की ओर
Success Story: 17 साल एयरलाइंस में नौकरी, फिर प्लास्टिक के खिलाफ छेड़ी मुहिम! जानिए कैसे एक आइडिया बना पर्यावरण बचाने का हथियार

Image: Zee News
रूपेश के. संघवी ने 17 वर्षों तक एयरलाइंस में काम किया, फिर प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ मुहिम शुरू की। उन्होंने Edybites नामक स्टार्टअप की स्थापना की, जो खाने योग्य चम्मच बनाता है, जिससे प्लास्टिक का उपयोग कम होता है। यह उत्पाद पर्यावरण के लिए फायदेमंद है और लोगों की जरूरतें भी पूरी करता है।
- 01रूपेश संघवी ने 17 साल एयरलाइंस में काम किया और प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को देखा।
- 02Edybites नामक स्टार्टअप ने बाजरे से बने खाने योग्य चम्मच विकसित किए हैं।
- 03यह चम्मच न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं।
- 04रूपेश का मानना है कि ग्रीन बिजनेस तभी सफल होगा जब वह आर्थिक रूप से भी मजबूत हो।
- 05Edybites का मॉडल बड़े स्तर पर काम करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे प्लास्टिक का उपयोग कम हो सके।
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रूपेश के. संघवी की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे एक साधारण विचार से पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक एयरलाइंस और ट्रैवल इंडस्ट्री में काम किया, जहां उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीरता को महसूस किया। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए उन्होंने Edybites नामक स्टार्टअप की स्थापना की, जो बाजरे से बने खाने योग्य चम्मच बनाता है। यह चम्मच न केवल प्लास्टिक का विकल्प है, बल्कि इसे खाने के बाद फेंकने की आवश्यकता नहीं होती। रूपेश का मानना है कि पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तभी सफल होंगे जब वे लोगों के लिए सुविधाजनक हों। उनका स्टार्टअप एयरलाइंस, अस्पतालों और इवेंट कंपनियों द्वारा तेजी से अपनाया जा रहा है। रूपेश की कहानी यह दर्शाती है कि किसी भी उम्र में बदलाव संभव है और एक साधारण विचार भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। Edybites एक ऐसा उदाहरण है जहां व्यापार और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलते हैं।
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Edybites जैसे उत्पादों से प्लास्टिक प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकेगा।
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