सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 40 साल तक अटकी रही हत्या की अपील पर जताई चिंता

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, विशेष रूप से एक हत्या की अपील जो 40 वर्षों से अधिक समय से लंबित है। न्यायालय ने सुझाव मांगे हैं कि कैसे पेंडेंसी को कम किया जा सकता है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है।
- 02एक हत्या के मामले में विजय सिंह की अपील 41 वर्षों से लंबित है, जिसे 1985 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों के समाधान के लिए सुझाव मांगे हैं।
- 04अदालत ने कहा कि केवल लंबित रहने के आधार पर मामलों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
- 05विजय सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि उन्होंने अपना अधिकांश जीवन एक आपराधिक दोष सिद्धि की छाया में बिताया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने एक हत्या के मामले में दोषी विजय सिंह की अपील को लेकर चिंता जताई, जो 40 वर्षों से अधिक समय से लंबित है। विजय सिंह को 1985 में अपने भाई की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, और उनकी अपील पर फैसला आने में लगभग 41 वर्ष लगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विजय सिंह केवल तीन महीने जेल में रहे और फिर जमानत पर रिहा होकर 43 वर्षों तक अपनी अपील का इंतजार करते रहे। पीठ ने सुझाव मांगे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडेंसी को कम करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि लंबित मामलों को केवल समय के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे जनहित प्रभावित हो सकता है। विजय सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि उन्होंने अपना पूरा यौवन और मध्य आयु एक आपराधिक दोष सिद्धि की छाया में बिताया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्यायिक प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करती है।
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