H-1B वीजा फीस रद्द, भारतीयों को मिलेगी राहत
ट्रंप का दांव फेल, भारतीयों को राहत! H-1B वीजा पर रद्द हुई ₹95 लाख की भारी-भरकम फीस; अब बस इतना लग सकता है शुल्क

Image: Jagran
अमेरिकी जज ने H-1B वीजा पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ₹95 लाख की फीस को रद्द कर दिया है। यह निर्णय ट्रंप के इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका है, जिससे भारतीय पेशेवरों को राहत मिलेगी।
- 01मैसाचुसेट्स के फेडरल जज लियो सोरोकिन ने H-1B वीजा पर ट्रंप द्वारा लागू की गई $1,00,000 (₹95 लाख) की फीस को रद्द किया।
- 02जज ने कहा कि यह फीस एक 'अनधिकृत टैक्स' है, जिसे केवल कांग्रेस ही लागू कर सकती है।
- 03H-1B वीजा का 70% उपयोग भारतीय पेशेवर करते हैं, जिससे यह फीस भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए चिंता का विषय बन गई थी।
- 04ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह फीस H-1B प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक थी।
- 05इस निर्णय से भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में काम करने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर कानूनी झटका लगा है जब मैसाचुसेट्स के फेडरल जज लियो सोरोकिन ने H-1B वीजा पर $1,00,000 (लगभग ₹95 लाख) की फीस को रद्द कर दिया। जज ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि प्रशासन के पास इस तरह का टैक्स लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है। ट्रंप ने यह फीस विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने वाले एम्प्लॉयर्स पर लागू की थी, जिसका उद्देश्य H-1B प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकना था। जज ने यह भी बताया कि यह फीस एक 'अनधिकृत टैक्स' है और इसे केवल कांग्रेस द्वारा लागू किया जा सकता है। इस फैसले से भारतीय पेशेवरों को राहत मिलेगी, क्योंकि H-1B वीजा का 70% उपयोग भारतीयों द्वारा किया जाता है। हर साल 65,000 रेगुलर H-1B वीजा दिए जाते हैं, जिससे यह निर्णय भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है।
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इस निर्णय से भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में काम करने के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी लाभ होगा।
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