IMD ने अल नीनो पर कह दी तबीयत खुश करने वाली बात, न गला सूखेगा, न झेलनी पड़ेगी भयानक लू की मार
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IMD El Nino Update: भारत के लाखों-करोड़ों लोगों को इन दिनों भीषण गर्मी का समाना करना पड़ रहा है. पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मौसमी परिवर्तन की वजह से आंधी-तूफान और बारिश की घटनाएं भी हो रही हैं. पिछले दिनों दिल्ली-एनसीआर में तेज हवा के साथ बारिश हुई है. आने वाले दिनों में भी तेज हवा के साथ बरसात की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग का कहना है कि अल नीनो की वजह से इस साल ज्यादा गर्मी और कम बारिश होने के आसार हैं. IMD के इस पूर्वानुमान का असर दिखने भी लगा है. अल नीनो की वजह से कम बारिश होने की भविष्यवाणी ने किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं. इन सब मौसमी खलल के बीच IMD ने अगले साल अल नीनो की स्थिति को लेकर नया सुखद पूर्वानुमान जारी किया है. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि साल 2027 में अल नीनो कमजोर पड़ जाएगा और ला नीना मजबूत होगा. इस वजह से सामान्य या फिर उससे ज्यादा बारिश होने की प्रबल संभावना है. प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा अल नीनो भले ही वैश्विक मौसम प्रणाली के लिए चिंता बढ़ा रहा हो, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर भारत के 2027 के मानसून पर सीमित रह सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह शक्तिशाली अल नीनो इस वर्ष के अंत या सर्दियों के दौरान चरम पर पहुंचेगा और उसके बाद धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएगा. ऐसे में अगले वर्ष जून से शुरू होने वाले भारतीय मानसून तक इसके प्रभाव के काफी कम होने की संभावना है. इससे देश की कृषि अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा को राहत मिल सकती है. क्या है अल नीनो? अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के समुद्री सतह तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है, जो दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है. भारत में यह अक्सर कमजोर मानसून, असमान वर्षा, फसलों पर दबाव और जलाशयों में पानी की कमी से जुड़ा होता है. इसके विपरीत ला नीना की स्थिति मानसूनी गतिविधियों को मजबूत करती है और सामान्य से अधिक बारिश ला सकती है. मौसम विशेषज्ञों की क्या राय? मौसम वैज्ञानिकों ने 1951 के बाद के प्रमुख अल नीनो वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन किया है. 1997-98 और 2015-16 जैसे सबसे शक्तिशाली अल नीनो एपिसोड में देखा गया कि समुद्री तापमान वर्ष के दूसरे हिस्से में तेजी से बढ़ा, सर्दियों में चरम पर पहुंचा और फिर अगले मानसून से पहले कमजोर हो गया. 1997-98 के दौरान समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि 2.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई थी, लेकिन 1998 के मध्य तक यह स्थिति ला नीना में बदल गई थी. इसी तरह 2015-16 में भी तापमान दो डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद अगले मानसून से पहले तेजी से घट गया. IMD का क्या कहना है? ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि मजबूत अल नीनो आमतौर पर वर्ष के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत में चरम पर पहुंचता है और उसके बाद कमजोर होने लगता है. अधिकारी के अनुसार 2027 के मानसून से पहले इसके न्यूट्रल या ला नीना चरण में पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि लंबी अवधि के मौसम पूर्वानुमानों में अनिश्चितता बनी रहती है. स्काईमेट वेदर की मानें तो केवल अल नीनो की तीव्रता ही भारतीय मानसून की दिशा तय नहीं करती. उन्होंने कहा कि कई बार कमजोर अल नीनो के दौरान सूखे की स्थिति बनी, जबकि कुछ मजबूत अल नीनो वर्षों में मानसून पर गंभीर असर नहीं पड़ा.
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