आईपीएस पारिस देशमुख की नई नियुक्ति: बीएसएफ में डीआईजी के रूप में शामिल
पेपर लीक माफियाओं के लिए काल बने आईपीएस पारिस देशमुख अब बीएसएफ में
Image: Globalherald
राजस्थान के आईपीएस अधिकारी पारिस देशमुख को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के पद पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने राजस्थान में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिसमें कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश शामिल है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और साहसिक कार्यों के लिए उन्हें जाना जाता है।
- 01पारिस देशमुख को बीएसएफ में डीआईजी के पद पर नियुक्त किया गया है।
- 02उन्होंने राजस्थान में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए।
- 03देशमुख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का नवाचार किया।
- 04उन्होंने कई जिलों में एसपी के रूप में कार्य किया है, जैसे अलवर, चूरू, और नागौर।
- 05पारिस देशमुख ने कई खतरनाक एनकाउंटर में भाग लिया, जिसमें वे खुद घायल हुए।
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राजस्थान के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी पारिस देशमुख को हाल ही में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत की गई है। देशमुख ने अपनी पिछली भूमिका में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) में कार्य करते हुए पेपर लीक माफियाओं और नकल गिरोह के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कार्रवाइयाँ कीं। उनके नेतृत्व में एसओजी ने कई बड़े पेपरलीक घोटालों का पर्दाफाश किया, जिसमें बाबू लाल कटारा और पौरव कालेर जैसे गिरोहों का खुलासा शामिल है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर नकल माफियाओं को पकड़ने में मदद की। पारिस देशमुख की पहचान उनकी बौद्धिक क्षमता और साहसिक कार्यों के लिए भी है, जैसे कि कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर साथी पुलिसकर्मियों को सुरक्षित निकाला। वे मूल रूप से महाराष्ट्र के गोंदिया के निवासी हैं और 2010 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।
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पारिस देशमुख की नियुक्ति से सीमा सुरक्षा बल की कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद है, जो कि देश की सुरक्षा को मजबूत कर सकता है।
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