TMC में बगावत: 19 सांसदों की संख्या का महत्व और राघव चड्ढा का फॉर्मूला
राघव चड्ढा का फॉर्मूला काकोली घोष के लिए कितना कारगर? TMC बगावत में क्यों अहम है 19 सांसदों का आंकड़ा
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत के बीच 19 सांसदों की संख्या महत्वपूर्ण है। काकोली घोष दस्तीदार का दावा है कि उनके पास 20 सांसदों का समर्थन है, लेकिन दल-बदल कानून के तहत यह संख्या निर्णायक है। राघव चड्ढा फॉर्मूला चर्चा में है, लेकिन कानूनी चुनौतियाँ भी हैं।
- 01काकोली घोष दस्तीदार का कहना है कि उनके पास लगभग 20 सांसदों का समर्थन है।
- 0219 सांसदों की संख्या दल-बदल कानून के तहत संरक्षण पाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- 03राघव चड्ढा का फॉर्मूला पहले AAP के सांसदों द्वारा अपनाया गया था।
- 04TMC के वफादार नेताओं ने बागी सांसदों पर विश्वासघात का आरोप लगाया है।
- 05पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी TMC को बागी विधायकों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत के बीच 19 सांसदों की संख्या चर्चा का विषय बनी हुई है। काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके पास लगभग 20 सांसदों का समर्थन है, लेकिन उनका राजनीतिक भविष्य इस संख्या पर निर्भर करता है। यदि 19 सांसद किसी अन्य पार्टी में विलय करते हैं, तो उन्हें दल-बदल कानून से सुरक्षा मिल सकती है। राघव चड्ढा का फॉर्मूला, जो पहले आम आदमी पार्टी के सांसदों द्वारा अपनाया गया था, अब TMC में भी चर्चा में है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल संख्या जुटाना ही पर्याप्त नहीं है; विधिवत विलय भी आवश्यक है। TMC के वफादार नेताओं ने बागी सांसदों पर जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है और कहा है कि यदि बागी सांसदों को अपने समर्थन पर भरोसा है, तो उन्हें इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ना चाहिए। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी TMC को बागी विधायकों की संख्या में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है।
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TMC के सांसदों और विधायकों के बीच बगावत से पार्टी की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
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