युवाओं ने सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और महत्व को समझा
Kullu News: सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और महत्व से रूबरू हुए युवा
Amar Ujala
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वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत बिहार और उत्तर प्रदेश के युवा प्रतिभागियों ने लाहौल-स्पीति में सीमांत क्षेत्रों की भौगोलिक, सामरिक और पर्यावरणीय विशेषताओं का अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य जागरूकता के बारे में भी जानकारी दी गई।
- 01प्रतिभागियों ने सीमांत क्षेत्रों की सामरिक महत्ता और सुरक्षा बलों की भूमिका के बारे में जानकारी प्राप्त की।
- 02डॉ. विश्वेश सिंह ने आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।
- 03डीएफओ गोल्डी छाबड़ा ने लाहौल-स्पीति के पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों के संरक्षण पर जानकारी साझा की।
- 04आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ संवाद में उच्च हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों को समझा गया।
- 05कार्यक्रम का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग से हुआ।
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वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत बिहार और उत्तर प्रदेश से आए युवाओं ने लाहौल-स्पीति के सीमांत क्षेत्रों की भौगोलिक, सामरिक और पर्यावरणीय विशेषताओं का अध्ययन किया। इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सीमा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के विषयों पर जानकारी दी गई। एसीएमओ डॉ. विश्वेश सिंह ने प्रतिभागियों के स्वास्थ्य की जांच की और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। निरीक्षक मस्तराम सिंह ने सीमांत क्षेत्रों की सामरिक महत्ता और सुरक्षा बलों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा, डीएफओ गोल्डी छाबड़ा ने लाहौल-स्पीति के शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र और वहां के वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर 17वीं वाहिनी आईटीबीपी फॉरवर्ड बेस पोस्ट के कमांडिंग ऑफिसर प्रवीण रावत भी उपस्थित रहे।
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इस कार्यक्रम से युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और सुरक्षा के महत्व को समझने का अवसर मिला है।
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