संजय झील में जलापूर्ति बहाल, पर्यावरणीय संकट का हल
दैनिक जागरण की खबर का असर, 182 एकड़ में फैली संजय झील में लौटा जीवन; एसटीपी से पानी की आपूर्ति शुरू
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Image: Jagran
यमुनापार की संजय झील में चार महीने की सूखे के बाद जलापूर्ति शनिवार से फिर से शुरू हो गई है। दैनिक जागरण की रिपोर्टिंग के बाद अधिकारियों ने झील में पानी छोड़ने का निर्णय लिया। यह झील 182 एकड़ में फैली हुई है और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन जलस्तर में कमी के कारण मछलियों और वन्यजीवों को संकट का सामना करना पड़ा।
- 01संजय झील में जलापूर्ति का काम शनिवार से शुरू हुआ, जो चार महीने से रुका हुआ था।
- 02झील के जलस्तर में कमी के कारण मछलियों की मौत हुई थी, जिससे दुर्गंध फैलने लगी थी।
- 03दैनिक जागरण की रिपोर्टिंग ने अधिकारियों को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया।
- 04संजय झील का क्षेत्र 182 एकड़ में फैला हुआ है और यह पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- 05झील को पहले जैसी स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं।
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यमुनापार की संजय झील, जो करीब 182 एकड़ में फैली है, में चार महीने से सूखे के कारण जलस्तर में भारी कमी आई थी। इस दौरान झील में मछलियों की मौत और दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दैनिक जागरण ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद अधिकारियों ने स्थिति का निरीक्षण किया और शनिवार से जलापूर्ति बहाल करने का निर्णय लिया। अब एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से शोधित पानी झील में छोड़ा जा रहा है। हालांकि, जलस्तर में कमी के कारण झील की तलहटी में दरारें पड़ गई हैं और छोटे पौधों को भी नुकसान हुआ है। झील के रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली जल बोर्ड पर है। झील की पूरी स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं। यदि समय रहते इस मुद्दे को नहीं उठाया जाता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
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संजय झील की जलापूर्ति बहाल होने से स्थानीय पर्यावरण और जीव-जंतुओं को राहत मिलेगी।
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