साइबर अपराधियों के 'म्यूल खाते': ठगी की करोड़ों की कमाई छिपाने का नया तरीका
साइबर अपराधियों का नया जाल: कैसे बन रहे है 'म्यूल खाते' ठगी की करोड़ों की कमाई छिपाने का जरिया, जानिए पूरा खेल

Image: Amar Ujala
साइबर अपराधियों ने 'म्यूल खातों' का उपयोग कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। एसटीएफ की जांच में पाया गया कि ये खाते भोले-भाले लोगों के नाम पर खोले जाते हैं, जिससे अपराधी धन को छिपाते और ट्रांसफर करते हैं।
- 01एसटीएफ की जांच में पाया गया कि विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधों से जुड़े लगभग ₹5 लाख की धोखाधड़ी की धनराशि एक बैंक खाते में आई थी।
- 02म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते हैं जो अपराधियों द्वारा भोले लोगों के नाम पर खोले जाते हैं, जिनका उपयोग धोखाधड़ी के धन को छिपाने के लिए किया जाता है।
- 03महेश नामक खाताधारक ने बताया कि हरजीत सिंह ने उसके खाते में लगभग ₹10 लाख मंगवाए थे।
- 04एक अन्य खाते में ₹1.4 करोड़, ₹30.80 लाख और ₹4.61 लाख की धोखाधड़ी की धनराशि प्राप्त हुई थी।
- 05एसटीएफ ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और कुछ अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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उत्तराखंड की एसटीएफ ने साइबर अपराधियों के 'म्यूल खातों' का खुलासा किया है, जिनका उपयोग ठगी की करोड़ों की कमाई को छिपाने के लिए किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगों ने भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराध से अर्जित धनराशि को छिपाने और विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा है। नैनीताल बैंक के एक खाते में लगभग ₹5 लाख की धोखाधड़ी की धनराशि मिली, जिसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। महेश नामक खाताधारक ने बताया कि हरजीत सिंह ने उसके खाते में करीब ₹10 लाख मंगवाए थे। इसके अलावा, एक अन्य खाते में ₹1.4 करोड़, ₹30.80 लाख और ₹4.61 लाख की धोखाधड़ी की धनराशि दर्ज की गई है। एसटीएफ ने इस मामले में तीन व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और कुछ अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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यह मामला स्थानीय लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करता है और उनके बैंक खातों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता को उजागर करता है।
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