सियासी गलियारों में हलचल: 'आपातकाल के दौरान बंद लोगों में से लगभग 80 प्रतिशत संघ से थे', रामलाल का दावा
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पीटीआई, मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने शनिवार को दावा किया कि यदि आरएसएस कार्यकर्ताओं ने आपातकाल के विरुद्ध सत्याग्रह में बड़ी संख्या में भाग नहीं लिया होता तो इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1977 में आम चुनाव नहीं कराए होते। वह आरएसएस के कोंकण डिवीजन की बैठक के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने दावा किया कि आपातकाल के दौरान जेल में बंद लोगों में से लगभग 80 प्रतिशत आरएसएस कार्यकर्ता थे। उन्होंने स्वयं उस दौरान आठ महीने जेल में बिताए थे। संगठन के योगदान के बारे में बात करते हुए रामलाल ने कहा कि भारत ने जितने भी युद्ध लड़े, उनमें आरएसएस के स्वयंसेवक भारतीय सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हवाई मार्ग से गिराई गई सैन्य सामग्री एक खतरनाक क्षेत्र में गिरी थी। जवानों पर दुश्मन का ध्यान जा सकता था। किसी ने उन्हें बताया कि पास में ही एक गांव है, जहां आरएसएस के स्वयंसेवक हर शाम एकत्र होते हैं। स्वयंसेवक रेंगते हुए उस जगह तक पहुंचे जहां सामग्री गिरी थी और उसे वापस ले आए। उनके नाम कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन इस कार्रवाई में चार लोगों की जान चली गई। उन्होंने बताया कि आरएसएस कार्यकर्ताओं ने संकट के समय नागरिक प्रशासन की भी सहायता की, जिसमें 1965 के युद्ध के दौरान दिल्ली में यातायात व्यवस्था संभालना भी शामिल है। कहा कि आरएसएस अपनी दैनिक शाखाओं के माध्यम से अनुशासन, समन्वय और सामूहिक कार्यप्रणाली पर जोर देता है। आरएसएस में सबके साथ मिलकर काम करना और मेलजोल रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए तन, मन और बुद्धि के समन्वय की आवश्यकता होती है। हिंदुत्व विचारधारा का समर्थन करने वाले हमेशा सभी के कल्याण के बारे में सोचते हैं। दुर्भाग्य से आज जो भी भारत के खिलाफ है उसे उदार और प्रगतिशील कहा जाता है। जबकि हिंदुत्व की बात करने वालों को सांप्रदायिक या संकीर्ण सोच वाला करार दिया जाता है।
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