कोरोना के बाद युवाओं में बढ़ रही कूल्हे की बीमारी, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
कोरोना के बाद युवाओं में बढ़ रही ये बीमारी, कहीं आपने तो नहीं खाई थी ये दवा
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कोरोना के बाद, स्टेरॉयड के अत्यधिक उपयोग से 30-40 वर्ष के युवाओं में कूल्हे की हड्डी में खराबी की समस्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच न कराने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। जागरूकता और सही उपचार के लिए डॉक्टरों ने तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
- 01कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड के अधिक उपयोग से कूल्हे की हड्डी में खराबी की समस्या बढ़ी है।
- 02दिल्ली में कूल्हे के ऑपरेशन के मामलों में 40% वृद्धि हुई है, खासकर युवा मरीजों में।
- 03शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से हड्डी की स्थिति गंभीर हो सकती है।
- 04MRI जांच से शुरुआती पहचान संभव है, जिससे हड्डी को बचाया जा सकता है।
- 05डॉक्टरों ने स्टेरॉयड के उपयोग पर सावधानी बरतने और नई तकनीकों की ट्रेनिंग पर जोर दिया।
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कोरोना महामारी के बाद, डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जिन मरीजों को कोविड के इलाज में अधिक स्टेरॉयड दिए गए थे, उनमें कूल्हे की हड्डी में खराबी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों में नहीं, बल्कि 30 से 40 वर्ष के युवाओं में भी देखी जा रही है। दिल्ली में हाल ही में आयोजित 'दिल्ली HIP 360 सम्मेलन' में विशेषज्ञों ने बताया कि उनके अस्पताल में युवा मरीजों में कूल्हे के ऑपरेशन के मामलों में 40% की वृद्धि हुई है। प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज करने से स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि अगर कोविड के बाद कूल्हे या जांघ में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा, स्टेरॉयड दवाइयां बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। नई तकनीकों से कूल्हे के ऑपरेशन अब पहले से अधिक सुरक्षित और सफल हो गए हैं। यदि जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो अगले 10 वर्षों में कूल्हे के ऑपरेशन की मांग में भारी वृद्धि हो सकती है।
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यदि समय पर जांच नहीं कराई गई, तो युवाओं में कूल्हे की समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिससे उन्हें सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
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